माँ – मेरे जीवन का प्रकाश
मेरी माँ हैं इस संसार की सबसे अनुपम,
उनके जैसा कोई नहीं इस सृष्टि में।
वे ही हैं मेरे जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा,
जिनसे मिली मुझे जीने की सच्ची साधना।
जीवन के हर कठिन मोड़ पर,
हर छोटे-बड़े संघर्ष के क्षण पर,
उन्होंने कभी मेरा साथ नहीं छोड़ा।
सदैव मेरा हाथ थामे रखा,
हर संकट से मुझे बचाया।
वे ही मेरी शक्ति हैं,
वे ही मेरी हिम्मत हैं।
उनसे बढ़कर इस संसार में
मेरा कोई अपना नहीं।
उनसे ही मेरी अच्छाई है,
उनसे ही मेरी सच्चाई है।
वे नहीं, तो मैं भी नहीं।
उन्होंने अपने त्याग, तप और प्रेम से
मेरा भविष्य उज्ज्वल बनाया।
उन्होंने मुझे सिखाया—
समय का मूल्य क्या होता है,
संघर्षों से लड़ना क्या होता है,
और अभावों को भी
अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाना क्या होता है।
हे मेरी प्यारी माँ!
आपका स्नेह अथाह है,
आपका प्रेम निष्कलंक है।
आप सबका ध्यान रखती हैं,
सबके लिए दुआएँ माँगती हैं,
और अपने वात्सल्य की छाया
सदैव हम सब पर बनाए रखती हैं।
मैं नमन करती हूँ अपनी माँ को,
जिनके चरणों में मेरा समस्त सम्मान है।
यदि इस जीवन में मुझे कुछ भी अच्छा मिला है,
तो वह आपकी ही सीख,
आपके ही संस्कार,
और आपके ही आशीर्वाद का परिणाम है।
हे माँ!
आप मेरे जीवन का प्रकाश हैं,
मेरी पहली गुरु हैं,
मेरी सबसे बड़ी शक्ति हैं।
आपके चरणों में मेरा
कोटि-कोटि प्रणाम।