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तू और मेरी मोहब्बत
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इन फूलों ने महकना तुझी से सीखा है,
इन हवाओं ने मचलना तुझी से सीखा है।
चाँद भी रात भर जगमगाता रहा,
इन सितारों ने चमकना तुझी से सीखा है।
तेरी आवाज़ को खूब सुनता हूँ मैं,
तेरे ही ख़्वाब को रोज़ बुनता हूँ मैं।
तू जो मिल जाए तो मुकम्मल हो जाए ज़िंदगी,
मेरी हर दुआ में बस तुझी को चुनता हूँ मैं।
मेरा हर दिन और मेरी हर शाम तू,
मेरी मोहब्बत का एक इनाम तू।
तुझसे ही मैंने इस जहाँ को जाना,
मेरी हर पहचान, मेरा हर नाम तू।
दिल को मिला बस तेरा ही सहारा,
भटकता रहा यह कब से बेचारा।
छुआ तूने जब इन धड़कनों को,
मानो कश्तियों को मिल गया किनारा।
तेरी बाहों में ही अब सुकूँ पाऊँगा,
इस दिल को खुशियों से सजाऊँगा।
लिख दिया है कागज पर इस रिश्ते का नाम,
अब यह रिश्ता मैं मरते दम तक निभाऊँगा।
-MASHAALLHA
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