एक गलत चुनाव...
ज़िंदगी तबाह हो गई,
जिसे अपना समझकर चुना था,
उसी के हाथों खुद को
हर दिन थोड़ा-थोड़ा टूटते देखा है।
हमने उसे अपना पूरा जहाँ समझ लिया,
और उसने हमें
अपनी ज़िंदगी का एक हिस्सा भी नहीं समझा।
जिसके साथ उम्र बिताने के सपने देखे थे,
आज उसी की यादें
रातों की नींद छीन लेती हैं।
गलती बस इतनी थी कि
हमने इंसान को नहीं,
अपने प्यार को सच मान लिया।
काश उस दिन दिल की जगह
दिमाग से फैसला लिया होता,
तो शायद आज
हम खुद से इतनी नफरत न करते।
अब किसी से शिकायत भी क्या करें...
फैसला हमारा था,
गलती हमारी थी,
और सज़ा भी हम ही भुगत रहे हैं।
**कुछ गलत फैसले
सिर्फ रिश्ते नहीं छीनते,
वो इंसान से उसकी हँसी,
उसका सुकून
और जीने की वजह तक छीन लेते हैं।**
आज भी खुद से एक सवाल करता हूँ—
आखिर मैंने उसे ही क्यों चुना था?
जिसे पाने के लिए
मैंने अपनी पूरी ज़िंदगी दाँव पर लगा दी,
उसी को पाकर
मैं अपनी ही ज़िंदगी हार गया...