"मन की शक्ति और संकल्प"
मन एक छपाई मशीन है, जो रोज़ दिखाता जाता है,
जो बार-बार तुम सोचते हो, सच वही बनाता जाता है!
डर, शक और नकारात्मकता के बीज न मन में बोओ तुम,
जीवन बदलना है अगर तो, भीतर की तस्वीरें संजोओ तुम।
मन सरल है, नहीं जानता क्या अच्छा क्या खोटा है,
दौर दोहराव का दिखता है, जो बोया, वही तो काटा है!
बच्चा जब साइकिल सीखे, गिरता है, डर जाता है,
पर 'चला सकता हूँ मैं खुद को' जब मन में भाव जगाता है।
तस्वीर बदलती भीतर जब, बाहर खेल बदल जाता है,
विचारों की इस शक्ति से ही, भविष्य नया बन जाता है!
डर को रोको, कमी न भूलो, तुम लक्ष्य नया निर्धारण करो,
शांत और सक्षम हो खुद को, हर पल महसूस करो।
दो तरह के लोग यहाँ हैं, एक बहने वाले होते हैं,
दूसरे खुद अपने मन को, सही राह पर लाते हैं।
खाली कमरा धूल धरे, मन खाली रहे तो चिंता छाए,
उत्तम विचारों के रंगों से, मन का कोना-कोना महकाओ तुम!
कल्पना और सच्चाई में, मन भेद नहीं कर पाता है,
सफल पुरुष पहले मन में, फिर जग में जीत दिखाता है।
हर इंसान में छिपी हुई है, एक असीम महान शक्ति,
योग्य समझ लो खुद को तो, बढ़ जाती है इच्छा शक्ति!
दूसरों की बातों पर मत अपनी तकदीर चलाओ,
भीतर जो छवि खुद गढ़ोगे, ऊँचाइयों पर अपने आप को पाओ तुम।
मन को प्रशिक्षण दे डालो, जैसे देह व्यायाम माँगे,
सही विचार न दो मन को तो, कमज़ोर विचार ही आगे आवें!
जागो और ऊर्जा बदलो, हर पल में ऊर्जा भरो,
अतीत का डर, भविष्य का भय, छोड़ो सब, अब अपना भाग्य गढ़ो!
मन जो चाहेगा, वो होगा, जब संकल्प जगेगा सीने में,
हार न मानो, डटे रहो तुम, इस जीवन को जीने में।
मन सेवक है, नहीं है मालिक, आदेश इसे तुम थमाओ,
जो चाहो तुम मन में छापो, और अपनी नियति बनाओ!