Quotes by Krishna singh in Bitesapp read free

Krishna singh

Krishna singh

@krishnagurjar917182


जानते हो क्या तुम प्रेम कि परिभाषा?
या दुनिया में रहते हुए हो गई तुम्हारी मति भी दुनियां की भांति।
तुम भी स्वार्थ को प्रेम समझने लगे हो या अब भी मानते हो तुम्हारे दिल के कोने में छिपी उस भावना का सच।
रौंद दिया क्या तुमने उस प्यार की कली को अपने अभिमान तले।
या लेश मात्र भी बचा है तुममे स्वार्थ से दूर सच्चे प्रेम को अभिमान से पहले रख पाने का धैर्य।
बताओ! क्या तुम अपने अभिमान के आगे उस प्रेम को रख पाओगे
या तुम्हारा अभिमान ले जाएगा तुम्हे प्रेम से दूर स्वार्थ की अंधेरी गलियों में।
तुम कहते हो न अभिमान नहीं है ये तो फिर प्रिय स्वाभिमान भी तो नहीं है तुम्हारा ये व्यवहार।
बोलो जानते हो क्या तुम सच्चे प्रेम की परिभाषा?

krishna singh

Read More

सोचता हूं किस कदर बदल जाते है
मानवीय स्वार्थ से परिपूर्ण रिश्ते, जहां शब्दों की जरा सी आहट क्यों बिखेर जाती है जन्मो तक साथ देने वाले वादों की श्रृंखला को क्या यही था गीता का संदेश, रामायण की सीख प्रेम से बंधे ये रिश्ते स्वार्थ के विवश क्यों चकनाचूर कर देते है रिश्तों की भावनाओं को क्या ये भावनाएं द्रवित हृदय में फिर से विश्वास के साथ जुड़ पाएगी क्यों भूल जाते है लोग रिश्तों की डोरी को, और बिना सोचे उछाल देते है हवा में इस बात का पता भी है कि वो डोरी कभी हमारे पास लौट भी आएगी या बस मन में छोड़ जाएगी ग्लानि
सोचता हूं किस कदर बदल जाते है मानवीय स्वार्थ से परिपूर्ण रिश्ते।

Read More

मां का प्यार दुनिया का अनमोल तौफा है इस प्यार को पाने के लिए भगवान भी धरती पर आए है और देवता धरती पर आने के लिए तरसते है
मां शब्द अपने आप में ही पूर्ण है हर किसी का स्थान ले सकती है हर किसी के जैसा प्रेम दे सकती है पर मां का स्थान न कोई ले सकता है और न ही उसके जैसा प्यार कोई दे सकता है।
अपने बच्चों की तकलीफ को सबसे पहले महसूस करने वाली औरत मां है
दुनियां में फरिश्ते नहीं होते है लेकिन हजारों फरिश्तों की तरह ख्वाहिश पूरा करती है मां।
मां से ही संतान का अस्तित्व है मां के बिना व्यक्ति का जीवन सभी सुविधाओं सुखो से पूर्ण होने के बाद भी अधूरा ही रहता है।
छोटा बच्चा हो या बूढ़ा व्यक्ति सभी को मां की जरूरत महसूस होती है।
हम जब भी घर में कदम रखते है चाहे कोई काम हो या न हो सबसे पहले मां को ही ढूंढते है थोड़ी देर ना दिखे तो मन बेचैन होने लगता है। मां का दिख जाना मात्र ही पर्याप्त होता है।

मां तू जननी जगद जननी है तुझसे पूर्ण मेरा आकर है तेरे बिन में यू हु बिना खुशबू का पुष्प हो।
मां तू मेरी कहानी की लेखिका है तेरे होने से ही मेरा जीवन सुखद है।

Read More