"मन की शक्ति और जीवन की दिशा"
कभी सोचा है तुमने, मन में क्या चलता है?
क्यों कोई सपना, सपना ही रह जाता है?
मन एक छपाई मशीन सा सदा काम करता है,
जो बार-बार सोचो, वही सच बन जाता है।
डर, शक और नकारात्मकता को जो अपनाते,
वे अनजाने में ही अपनी हार बुलवाते।
मन तो बस दोहराव और आदेश को जाने,
जो लगातार सोचो, सच उसे ही माने।
साइकिल चलाना सीखता जब कोई नादान,
गिरने के डर से होती उसकी हर धड़कन परेशान।
पर जैसे ही भीतर जगे "मैं चला सकता हूँ" विश्वास,
डर सारा मिट जाता, और पूरा हो जाता हर प्रयास।
विचारों में शक्ति है, इसे तुम पहचानो,
जो सोचोगे मन में, व्यवहार वही मानो।
डर को मत रोको तुम, न कमी को आने दो,
शांत और सक्षम हो, खुद को यह बताने दो।
मन नहीं समझता भाषा कभी 'ना' की,
यह तो बस सुने गूँज उस चाह और दुआ की।
जो सोचो भावना से, वह गहरा उतर जाता,
सफल इंसान पहले मन में ही जीत जाता।
खाली मन कमरे सा, धूल और भ्रम है पाता,
इसलिए इसे रोज तुम अच्छे विचारों से सजाना।
लक्ष्य की स्पष्ट छवि तुम मन में उतारो,
धीमे-धीमे ही सही, अपनी तकदीर बदलो।
पानी की धार जैसे पत्थर को है काटती,
निरंतर की सोच भी हर बाधा को है छाँटती।
मन तुम्हारा दुश्मन नहीं, सबसे बड़ा मित्र है,
इसको जो समझ ले, उसकी पक्की जीत है।
बाहर की दुनिया तो बस भीतर का है दर्पण,
जैसा बोओगे बीज, वैसा ही खिलेगा जीवन।
छोड़ो सब बहाने और डर की हर कहानी,
मन को दो सही दिशा, और बदलो अपनी जिंदगानी।