दो लफ्ज़
गजल
मीटा सही पर तकदीर है मेरा
आया नहीं पर जागीर है मेरा
मिला नहीं पर मंजिल है मेरा
हमें हासिल करना नहीं आता
नाहीं तो छिना
नाहीं अपनी मर्जी से अपना कह देना
हमें बस प्यार करना आता है
नाहीं रूठना आता है नाहीं मानना
हमें बस उसका इंतजार करना आता है