Hindi Quote in Poem by AbhiNisha

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मेरी कटी हुई बालों को देख रहे हैं
कविता


सब मेरी कटी हुई बालों को देख रहे हैं
मेरी थकी हुई आंखों को नहीं
सब मेरे कटे हुए बालों को देख रहे हैं
मेरे बेजान परे हुए जिस्मो को नहीं

कहते हैं बाल काटने के बाद
मैं अच्छी नहीं दिख रही
मेरी सुंदरता गायब हो गई है


लोग मेरी सुंदरता को देख रहे हैं
मेरे अंदर चल रही हलचल को नहीं


लोग मेरे कटे हुए बालों को देख रहे हैं
मेरे दर्द को नहीं


देखने का बहुत कुछ है
एक बदले हुए इंसान के अंदर
एक भटकते हुए रुह के अंदर

पर लोग वही देखना चाहते हैं
जो नारी के जिस्म में सजावट के काम करते हैं
काले घने बाल
सुंदर कपड़े सजी हुई चेहरे
पर जो नहीं देखते
रुह का तरपन


नहीं देखते थके हुए जिस्म को
नहीं देखते टूटती हुई हिम्मत को


नहीं देखते अटकती हुई सांसों को
नहीं देखते धक-धक धड़कते हुई धड़कनों को

नहीं देखते उसके कंपन को
जो हजारों उमिद टूट जाने के बाद होती है

जो हर जाने के बाद उठाती है
एक सेहरन सी पूरी बॉडी में
डर गुटन तरफ अकेलापन
हताशा निराशा नाउम्मीद


फिर भी ठेहरते हुए सांस धीरे-धीरे ले रहे हैं
कैसे वह जी रहे हैं

वह नहीं देखते एक इंसान जो चल रहा है
वह अंदर से जिंदा है
डरा हुआ है अकेला है
या कब की मर चुका है


वह कभी नहीं देखते
वह बस देखते हैं
रूप रंग चेहरे
हर ऊपरी बदलाव को
वह मन के अंदर की दुनिया को नहीं देखते

वो देखते हैं इस समाज में चल रही
उन औरतों को
जो खूबसूरती और लंबी वालों को सुंदरया मान चुके हैं



उन्हें नहीं भाता
वो औरतें जो खुद से परेशान होकर
खुद की ही बाल काट देती हैं
राहत पाने के लिए अपनी सर की बोझ थोड़ा कम कर देती है

पर अफसोस वह या नहीं देखते

Hindi Poem by AbhiNisha : 112028909
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