मैं और मेरे अह्सास
बहन एक रिश्ता शब्दों से परे
बहन एक रिश्ता शब्दों से परे होता हैं l
जीवन में माँ की परछाई बहन होती हैं l
प्यार और सुख की छाया को बोती हैं ll
बहुत छोटी उम्र में बड़ी बन जाती और l
भाई बहन के लिए सुख चैन खोती हैं ll
अपने अपनों के साथ कँधा मिलाकर l
सब के साथ हसती और साथ रोती हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह