मैं और मेरे अह्सास
मेरा गाँव भाता हैं
मेरा गाँव भाता हैं, मेरे पुरखों का स्वाभिमान हैं l
मेरा जन्म स्थान, रूह में बसा मेरा अभिमान हैं ll
कहानी औ किस्से का दौर,सभी हंसते करते मौज।
प्रेम जहां प्रीत, मनभावन रिवाज उसपे मान हैं ll
दिवाली दीप, होली रंग, मनभावन सा सुन्दर फाग।
रमणीय सुन्दर मेरे गाँव में बसती मेरी जान हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह