🙏🙏किसीने कहां 'मोहब्बत' दर्द देती है,
हा देती होगी,
उसकी 'चुभन' उस मोहब्बत को ओर 'गहरा' करती होगी।
जहां प्यार है वहां थोड़ी सी जुदाई का दर्द तो झेलना पड़ेगा।
वह तो कान्हा भी अपने जीवन वृतांत में दिखलाकर गये है।
मुझे लगता है कि राधा का विरह और विरह में भी एक संयम से ही कान्हा के नाम के आगे राधा का नाम पुकारने पर 'मुक्ति' मिलती होगी।
प्यार सही में मुक्ति देता है बंधन तो 'माया' का रुप है।
मोहब्बत में आयी जुदाई आंखों से आंसु की 'धारा' बहातीं है,
उस धारा में बहना या संभलकर दर्द झेलना वह व्यक्ति पर 'निर्भर' रहता है।
बहनें पर भी एक दर्द दिल को याद रखता है और संभलकर भी दो दिलों की धड़कन धड़कतीं रहतीं हैं।
मोहब्बत इश्वर की बनायीं हुई एक अलग ही कायनात है।🦚🦚