दुनिया की अजीब कहानी, सब सुनते और सुनाते।
अपने मतलब के पीछे ही, दिन-रात लगे रह जाते।।
सच्चाई को समझ न पाते, मन रहता बेचैन।
कैसे कोई समझाए इनको, बहाते आँसू व्यर्थ नैन।।
देखो इनकी हालत कैसी, रहते अक्सर मौन।
इनको देखकर समझ न आए, आखिर ये हैं कौन।।
स्वार्थ भरा है इनके मन में, चैन नहीं एक पल।
कैसे कोई समझाए इनको, समझें जीवन का फल।।
नहीं किसी की परवाह इनको, अपने में खोए रहते।
दूसरों के दुख-दर्द को भी, कभी न अपने संग कहते।।
दया और प्रेम से दूर हैं, मन हुआ है कठोर।
कैसे कोई समझाए इनको, क्या है जीवन का छोर।।
धन-दौलत को सबसे ऊपर, ये लोग मानते हैं।
सच और ईमान की बातें, कम ही पहचानते हैं।।
संतों की सीख भी इनको, लगती बिल्कुल फीकी।
कैसे कोई समझाए इनको, सोच हुई है रीती।।
मानव जीवन के बलिदानों को, ये याद नहीं करते।
झूठे आँसू बहाकर अक्सर, लोगों को बस भरमाते।।
ऐसे लोगों से बचकर रहना, यही बात है गंभीर।
कैसे कोई समझाए इनको, व्यर्थ बहाते नीर।।