खल्वत में तेरे ख़याल की खुशबू बसा ली है,
मैंने उजड़ी हुई महफ़िल फिर से सजा ली है।
दुनिया की भीड़ से अब कोई वास्ता नहीं मेरा,
तेरी यादों के साये में एक दुनिया बना ली है।
ज़माने की गर्द से बचकर निकाला है खुद को,
तेरी तस्वीर अपनी आँखों के नूर में छुपा ली है।
- known stranger