सपने सच हो
कविता
सपने सच हो ऐसा होता नहीं
और वो आऐगे
ऐसी झूठी वादे वह करता नहीं
तसल्ली तो देते झूठी ही सही
बहुत जल्द मिलेगी यह कहते
आने के बात नहीं
फिर भी
आस बनी है
क्या कहूं
उसके सांसों से धड़कनों का एहसास बनी है
वाती बिन दिया जलता नहीं
सिफ बिन मोती मिलता नहीं
मुझे उसके बिना नींद नहीं आती
वे बातें झूठी तो नहीं करता
पर चैन से सो जाते हैं
हम जगे आंखों में भी सपने देखते हैं
उन्हें सोने पर भी झूठे सपने देखना पसंद नहीं होता
ख्यालों में ही कहती हूं
ख्वाबों में आ के कहा जा
आईने को इलाबा मेरी दीदार तू भी कर
पर बात सच्ची तो कर
ऐसे ना हो तुम्हारे ख्वाहिश में हम जाए मार
तुमसे दूर हो जाऊं कोई बहाना आती नहीं
तुम्हारे सायों तले छुपे रहने की
लोगों ने वजह दी है
तुमसे दूर जाने का वजह कोई देता नहीं
सपने सच हो ऐसा होता नहीं
और दिल बेबस है हस भी नहीं सकते
और यह दिल रोता भी नहीं
और इस कविता की शुरुआती लाइन जो है
सपने सच हो ऐसा होता नहीं
और वह आऐ गे
ऐसी झूठी वादा वह करता नहीं
तसल्ली तो देते झूठी ही सही
बहुत जल्द मिलेगी या कहता
इस लाइन में अजीब से हरकतें हैं
एक इंसान जो झूठा वादा नहीं करता
कि वह आएगा
और तो और किसी को तसल्ली मिल जाए
इसलिए भी नहीं कहता
कि वह आएगा
और
आने की कोई बात नहीं होता
फिर भी कोई इंतजार कर रहा है
अपनी नींद गवा कर अपने चैन खो कर
एक इंसान जो जा चुका है
बिना कोई वादा किई
बिना कोई तसल्ली दिए
और वो अव चैन से सो रहा है
उसे कभीभी वजह की झूठे सपने देखना पसंद नहीं
और वो
कभी सच कहा ना
ही कभी झूठ बोला
उसका इंतजार कर रहे हैं
एक इंसान ने चैन से हंस सकता है
औऊ ना खुलकर रो सकता है
अगर यह कविता आप सबको अच्छी लगे
तो आगे पढ़ते रहिए
मैं आपका प्रिय लेखक अभी निशा ❤️🦋💯