मैं , मेरी आदतों से नाराज़ तो नहीं हूं
अंदर से आवाज़ आया, बस थोड़ी सी टूट चुकी हूं
बदल तो नहीं गई मै.....
हां, तकलीफें बढ़ कर तनाव का कारण बन चुकी है
सबको मैं गुस्सैल लगती हूं,,,
पर मेरे अंदर दबे जज़्बातों को कोई समझ नहीं पाता,
मैं ठीक हूं या नहीं....
कोई सवाल नहीं करता.....!!!!
- M K