अब डर नहीं हमें किसी अंधेरे का,
हमने खुद अपना सूरज जलाया है।
जो काँटे बिछाते थे कल तक राहों में,
आज उन्होंने ही फूलों से सजाया है।
ये रुतबा, ये शोहरत विरासत नहीं मेरी,
रातों की नींद और पसीने की कमाई है।
थक कर बैठ जाना फितरत नहीं मेरी,
मैंने गिर-गिर कर ही ऊँचाई पाई है।
जिन्होंने कहा था "नहीं होगा तुमसे",
उन्हें अपनी ख़ामोशी से जवाब देया है।
जो तंज कसते थे मेरी नाकामियों पर,
आज वही कहते हैं— "ये बंदा बड़ा प्यारा था!"
नियत साफ हो तो खुदा भी साथ देता है,
बस तू खुद से कभी हारना नहीं।
बनके मिसाल खड़ा हो जा दुनिया के आगे,
पीछे मुड़कर अब कभी देखना नहीं।