मैं और मेरे अह्सास
प्रणय गीत गाऊं
महफिल में प्रणय गीत गाऊं या ग़ज़ल को गुनगुनाऊं l
या फ़िर अपनी मुलाकातों के प्यारे किस्से सुनाऊं ll
आज तुम्हें खिलखिलाता मुस्कुराता देखने को l
तुम्हें पसंद आ जाए वहीं प्यारा सा नगमा गाऊं lll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह