कुछ रिश्ते
शोर नहीं करते,
बस निभाते रहते हैं।
और हम उन्हें
इतनी ख़ामोशी से खो देते हैं
कि बाद में रोने के लिए भी
कोई आवाज़ नहीं बचती।
तुम मेरे न थे,
फिर भी दिल ने तुम्हें अपनाया,
इस दिल के एक कोने में
तुम्हें ख़ुद से ज़्यादा सजाया।
फ़िर भी तुम न पहचान सकी,
क्यों मैने तुमको अपनाया,
पढ़ने वाला लड़का था,
किताबें छोड़, तुमसे दिल लगाया,
पल पल ऐसे टूट गया,
क्यू तुमने न समझाया,
प्यार मेरा तो सच्चा था,
इक तुमको ही न दिख पाया।
फिर लौट रहे उन अंधेरों में
जिनसे मैं था आया,
प्यार मेरा तो अमर रहेगा,
चाहे एक तरफ ही निभाया।