उम्रभर कारे-अजब करते रहे
ज़िंदगी तेरी तलब करते रहे
चल न पाया मैं ज़मीं पर ठीक से
लोग रस्सी पर ग़ज़ब करते रहे
बेअदब है तू हमारी ही तरह
इसलिये तो हम अदब करते रहे
रोज़ तितली की ज़रूरत मुतमइन
आपके आरिज़ो-लब करते रहे
मिल न पाया वो मेरा चेहरा मुझे
आइने अपना कसब करते रहे
ये हकीकत है कि पहुँचे एक दो
चाँद के चर्चे तो सब करते रहे
- भावेश पाठक
Gazals