Hindi Quote in Sorry by gunahon ka devta

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कब्र में कैद पंछी

उसे मैं हकीकत के बाद ख्वाबों में देखता हूँ
क्या करूँ हर रोज़ तड़पता हूँ
आँखें बंद करें के बाद वो नज़र आती
,आँखें खोलूँ तो गायब हो जाती है
इसलिए मैं आँखें बंद रखता हूँ ठोकर खाके गिरता रहता हूँ
अब होश मुझे बस ख्वाबों में रहता है हकीकत में हम रहते ही नहीं , आज किसी ने जीकर छेड़ दिया उसका , हम हकीकत से बेखबर उस से लड़ पड़े।
जब जाना ये ख्वाब नहीं हकीकत है तो हम सब समझ पड़े
आज भी उसका हिस्सा मेरे दिल में कहीं जिंदा है
उससे मैं बेखबर हर रोज़ ख्वाब सजाता हूँ
मैं उड़ रहा था ख्वाबों में पंछी बन कर अचानक से किसी ने मेरे पंख काट दिए और मैं गिरा उसके दिल में और हमेशा के लिए कब्र बन गया और ये कब्र मेरी थी , अनजान राहगीर तो मिलते रहते है अनजान राहगीरों से अनजान ही रहे तो बेहतर है, मुरझा गये सारे फूल मेरी कब्र के मुझे दफनाया भी तो फूलों के बगीचे में , मेरी वजह से एक गुलाब बर्बाद हो गया या शायद उसकी खुशबू से मैं ।
मैं बस अब देखता हूँ इस आसमान में छाए काले बादलों को
चाँद की रोशनी को घटते हुए , मरने के बाद मैं इन सब को ख्वाबों में नहीं देखता ना ही मैं खुदा के पास जाता हूँ मुझे डर लगता है कि खुदा उसकी बात न छेड़ दे ओर मैं फिर से हकीकत में ना जाऊँ।
दिल के एक कोने को हमेशा बंद रखा है ताकि कोई झाँक न ले मेरा प्यार उसके लिए
आज भी शायद उसे मुझ से प्यार या ये भी मेरा एक ख्वाब है फिर से उड़ान भरने का मेरा मन नहीं है कब्र में सोने का अब जी करता है अब मेरे ख्वाबों में जाने का वक्त हो गया वो भी गया अपने हमसफ़र के था उड़ान भरने के लिए हमारे पंख काट के छोड़ो अब रहने दो अब शिकायत करने का भी मन नहीं ,अब मैं जा रहा हूँ.....
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:ख्वाब ज़िंदा है और मैं अब कब्र में
कब्र सजा रखी बगीचे में मगर खुशबू तुम्हारी आती है
ख्वाब के सहारे कितने दिन जीते , पंछी कब्र में नहीं उड़ सकता ,छोड़िए तुम्हें क्या ही दर्द दे ख्वाबों का तुम भी तो मेरा एक ख्वाब हो ।
ध्यान से चलना कभी चोट न लग जाए तुम्हें मेरी कब्र से।
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Hindi Sorry by gunahon ka devta : 112035218
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