सुबह खुद चल कर आई
देखो मेरे दरवाज़े पर सुबह खुद चल कर आई,
देखो सूरज कैसे तक रहा है,
रात ने अपना बसेरा समेटा है।
देखो कल से बेहतर करने के लिए,
चिड़िया अपने राग से हमें समझाती है,
हम हार कर रात के साथ खो जाते हैं,
फिर दिन निकल आता है।
रास्ते खत्म नहीं होते,
फिर रास्ता बनाना पड़ता है,
हारना बुरा नहीं होता,
थोड़ा ठहर कर आगे चलना पड़ता है।