तेरी आँखों में सुबह का खुमार है,
तेरे चेहरे पर जैसे चाँदनी का निखार है।
तेरी हँसी में बारिशों की बहार है,
तेरी खुशबू में गुलाबों का खुमार है।
तेरी ज़ुल्फ़ें जैसे काली घटा घनेरी है,
फिर भी उनमें रोशनी बड़ी सुनहरी है।
तू चले तो हवाएँ भी तुझे निहारा करें,
तुझे देख आईने भी खुद को सँवारा करें।