तेरी आँखों की झील में, यह दिल डूब जाता है
तेरा चेहरा देखकर, चाँद भी शरमाता है।
ज़ुल्फ़ें जो बिखरे चेहरे पर, घटाएँ छाने लगती हैं,
तेरी पायल की छन-छन से, बहारें गाने लगती हैं।
तेरी इक हल्की सी मुस्कान, दिल का चैन चुराती है,
जैसे सूखी इस धरती पर, पहली बारिश आ जाती है।
गुलाबी होंठ ये तेरे, जैसे हों पंखुड़ी गुलाब की,
खुशबू तेरी महका देती है, हर राह इस दिल की।
तू खुदा की वो मूरत है, जिसे फुर्सत से बनाया है,
तेरी सादगी ने इस आशिक़ को, दीवाना बनाया है।