Hindi Quote in Whatsapp-Status by Nisha Choudhary

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रात के ग्यारह बज चुके थे। बारिश की हल्की बूंदें खिड़की पर दस्तक दे रही थीं और कबीर अपने पुराने लैपटॉप के सामने बैठा था। अचानक उसकी स्क्रीन पर एक पुराना फ़ोल्डर खुला—'आद्या'।
सात साल बीत चुके थे, पर उस नाम में आज भी वही कशिश थी जो पहली मुलाकात में थी।
कबीर और आद्या कॉलेज के उन पन्नों जैसे थे जो साथ मिलकर ही एक कहानी बनाते थे। कबीर खामोश, अपनी ही धुनों में खोया रहने वाला एक म्यूजिशियन, और आद्या, चहकती हुई वो धूप जो कबीर की हर उदासी को पिघला देती थी।
"अगर मैं कभी तुमसे दूर चली जाऊं तो क्या करोगे?" आद्या ने एक शाम कैंटीन की चाय पीते हुए अचानक पूछा था।
कबीर ने उसकी आँखों में झांककर हंसते हुए कहा था, "दूरी जिस्म की होती है आद्या, अहसास की नहीं। तुम जहाँ भी रहोगी, मेरी हर धुन में बजोगी।"
लेकिन ज़िंदगी कभी-कभी ऐसी परीक्षा लेती है जिसके लिए कोई तैयार नहीं होता। कॉलेज खत्म होते ही आद्या को पता चला कि उसे एक बेहद गंभीर बीमारी है। डॉक्टर ने साफ कह दिया था—वक्त बहुत कम है।
आद्या नहीं चाहती थी कि कबीर उसकी तकलीफ देखे या अपनी पूरी ज़िंदगी एक अधूरे इंतज़ार में बिता दे। उसने कबीर से दूरी बनानी शुरू कर दी। अचानक फोन उठाना बंद कर दिया, मैसेजेस के जवाब देना छोड़ दिया और एक दिन बिना कुछ कहे शहर छोड़कर चली गई।
कबीर टूट गया। उसने सोचा आद्या बदल गई है, उसका प्यार झूठा था। नफरत और दर्द के बीच कबीर ने खुद को संगीत में झोंक दिया। सालों बाद, वह एक मशहूर म्यूजिशियन बन गया, लेकिन उसकी हर धुन में एक अजीब सा सूनापन रहता था।
सात साल बाद, आज रात कबीर को आद्या की अलमारी से मिला एक लिफ़ाफ़ा उसकी बहन ने कूरियर से भेजा था।
कांपते हाथों से कबीर ने खत खोला। पन्ने पर आद्या की वही जानी-पहचानी लिखावट थी:
"सुनो कबीर,
अगर तुम यह पढ़ रहे हो, तो इसका मतलब मेरी सांसों का सफर पूरा हो चुका है। मुझे माफ कर देना कबीर, मैं तुमसे बिना कहे चली गई। तुम्हें लगता होगा कि मैंने तुम्हें धोखा दिया, लेकिन मैं तुम्हें अपनी बीमारी के साए में नहीं ढकेलना चाहती थी। मैं चाहती थी तुम उड़ो, अपनी धुनें बनाओ, मुस्कुराओ... न कि मेरे हस्पताल के कमरों में अपनी जवानी जाया करो।
तुमने कहा था न कि दूरी जिस्म की होती है, अहसास की नहीं? मैं आज भी तुम्हारी हर धुन में सांस लेती हूँ। मुझसे नफरत मत करना कबीर, मैंने सिर्फ तुमसे प्यार किया था... और आखिरी सांस तक सिर्फ तुम्हारा ही इंतज़ार किया।"
खत के साथ एक छोटी सी डायरी थी, जिसके हर पन्ने पर कबीर के गानों की तारीफ और आद्या का बेइंतहा प्यार लिखा था—उसकी ज़िंदगी के आखिरी दिनों तक।
कबीर की आंखों से आंसू छलककर उस पन्ने पर गिर पड़े। उस रात कबीर को समझ आया कि सच्चा प्यार वो नहीं जो साथ जीने के वादे करे, बल्कि प्यार तो वो कुर्बानी है जो दूसरे की खुशी के लिए खुद को खामोशी से मिटा दे।
कबीर ने गिटार उठाया। उस रात जो धुन बनी, उसमें दर्द तो था... पर उससे कहीं ज्यादा आद्या के लिए एक अमर प्यार था

Hindi Whatsapp-Status by Nisha Choudhary : 112034924
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