मोहब्बत का एहसास❣️
कभी ख़ामोशी में मुस्कुराना,
कभी तन्हाई में उसका नाम गुनगुनाना,
मोहब्बत कोई लफ़्ज़ों का खेल नहीं,
यह तो दो दिलों का एक खामोश अफ़साना।
न कोई शर्त, न कोई शिवा,
बस एक आस, एक अटूट दुआ,
उसकी हर खुशी में अपनी दुनिया देखना,
और उसके हर गम को अपना बना लेना।
नज़दीकियों से तय नहीं होतीं दूरी,
सच्ची चाहत तो होती है रूह से पूरी।
अगर वो पास न भी हो कभी,
तो उसकी यादों से महकती है ज़िंदगी पूरी।
इश्क़ वह धागा है जो दिखता नहीं,
पर इस बंधन जैसा कोई रिश्ता नहीं,
जहाँ ख़ुद को खोकर उसे पाया जाता है,
वही अहसास मोहब्बत कहलाता है।