तेरी खामोशी से भी एक रिश्ता पुराना है,
शिकायतों का दौर छोड़ना अब अपना ठिकाना है।
तू लाख छिपा ले निगाहें इस महफिल की भीड़ में,
इन पलकों का झुक जाना ही सारा फसाना है।
महसूस तुझे भी होता होगा हमारा यूं दूर रहना,
तन्हाई के लम्हों में सिर्फ हमें ही पाना है।