तुम हमें याद न करोें ये तुम्हारी मजबूरी होगी,
हम तो मजबूरी में याद करते हैं जिंदा रहने के लिए।
क्योंकि तुम जिंदगी हो हमारी, हर सांस में बसती हो,
कोई तो मजबूरी होगी तुम्हारी, जो मेरे दर्द-ए-दिल पे हंसती हो।
या तो ये हंसना दिखावा है दुनिया के लिए,
सच तो ये है कि अकेले में मिलने को तरसती हो।
रचनाकार - दीपक कुमार तिवारी