रूह की दहलीज पर अब सन्नाटा छाया है,
आपके बिना यह जहां बिल्कुल पराया है।
बुझ गई हैं वे सारी उम्मीदों की शमा,
बस एक दर्द है जो सांसों में समाया है।
पूछते हैं लोग मुझसे मेरी उदासी की वजह,
मैं किसे बताऊं कि मेरा सब कुछ कहां गया?
तेरी खुशबू आज भी इन हवाओं में जिंदा है,
मगर तू मुझे छोड़कर जाने कहां चला गया।
खाली कमरे की दीवारें भी अब मुझ पर हंसती हैं,
तेरी तस्वीर से बस आंखों से आंसू बरसती हैं।
कितनी मजबूरियां ले आईं यह जिंदगी हमें,
कि अब मौत से पहले ही मौत हमें डसती है।
तड़प यह है कि तेरा चेहरा देख नहीं सकते,
दर्द यह है कि तेरी यादों को मिटा नहीं सकते।
घुट-घुट कर जीने की यह सजा काफी लंबी है,
हम अपने ही अपनों की भीड़ में तन्हा हो गए।
अगर मिल जाओ कभी खुदा के दरबार में,
तो यह जरूर पूछेंगे उससे —
क्या मोहब्बत करना ही इस दिल का सबसे बड़ा गुनाह था,
या हम ही किसी और की किस्मत के हकदार थे?