खामोशी के इस शहर में एक आवाज अभी बाकी है,
तेरे-मेरे दरमियान बस एक लंबी रात बाकी है।
हमने चाहा था तुम्हें इस कदर अपनी रूह की गहराई से,
कि अब खुद के जिस्म में भी सिर्फ तेरी याद बाकी है।
वो लम्हे जब हमने हाथों में हाथ डालकर ख्वाब बुने थे,
वो आखिरी बार तेरा मुझे देखकर मुस्कुराना याद है।
तूने कहा था कि वक्त बदलने से जज्बात नहीं बदलते,
मगर आज हर मोड़ पर तेरा वादा बदलता हुआ दिखता है।
मैं अकेला चल पड़ा हूँ एक ऐसे रास्ते पर,
जहाँ मंजिल का पता नहीं और साथी कोई नहीं।
दिल के तारों में आज भी तेरी ही धुन गूँजती है,
पर इस गीत के आखिरी शब्दों में सिर्फ दर्द का संगीत है।
दिल के टुकड़े चुनते-चुनते हाथ जख्मी हो गए,
तेरे बिना अब ये दिन और रातें एक जैसे हो गए।
लोग पूछते हैं हमसे मेरी उदासी की वजह,
और हम चाह कर भी तेरा नाम लेने से डरते रहे।
कितनी शिद्दत से माँगा था खुदा से तुझे अपनी दुआओं में,
जैसे कोई फकीर अपनी आखिरी साँस माँगता है।
पर किस्मत के लिखे के आगे किसकी चली है आज तक?
तूने रास्ता बदल लिया और हम वहीं खड़े रह गए।
आँखों में आँसुओं का समुद्र लिए घूमता हूँ,
पर इस भीड़ में मुझे रुलाने वाला कोई नहीं।
तेरा वो आखिरी खत आज भी सीने से लगाए बैठा हूँ,
जिसमें लिखा था कि हम तुमसे जुदा कभी नहीं होंगे।
कितना झूठ था ना वो? या शायद मैं ही नादान था जो सच मान बैठा।
आज इस कागज पर अपने दिल का आखिरी कतरा बहा रहा हूँ,
तुझे पाने की जिद को आज मैं खुदा के हवाले कर रहा हूँ।
तू मेरी किस्मत में नहीं थी, ये सच मैंने मान लिया है,
मगर इस दिल से तेरा नाम मिटाना मेरे बस में नहीं है।
अगर अगले जन्म में कभी फिर से मुलाकात हो हमारी,
तो बस इतनी दुआ है कि ये फासले न हों दरमियान।
तब तक के लिए तेरी यादों के सहारे ही जी लेंगे हम,
तेरा अधूरा प्रेम ही मेरी जिंदगी का आखिरी सरमाया रहेगा।
जा तुझे आजाद किया हमने अपने हर एक हक से,
खुश रहे तू जहाँ भी रहे, बस यही दुआ है मेरी।
मेरा दिल टूटा है, जिस्म बिखर गया है,
पर तुझसे प्यार आज भी उतना ही पाक और बेहिसाब है।
रचनाकार - दीपक कुमार तिवारी