कहानियों की एक अपनी यात्रा होती है एक अपना ही संसार होता है हर कहानी अपने आप में अलग होती है कुछ बस आपको हंसती है कुछ रुलाते हैं तो कुछ ऐसी होती है जो आपको कुछ सीखा देती है बचपन में सुनी हुई कहानी तो कहीं ना कहीं सब के साथ ही रहती है उनके आदतों में या फिर बचपन की मीठी सी याद बनकर किताब और कहानियों की दुनिया असली दुनिया से काफी अलग और मजेदार होती है हर कहानी अपने लेखक का नजरिया दिखती है जिंदगी के कुछ सबक सिखाती है यह तो सब में कई बार सुना है की किताबों से अच्छा कोई दोस्त नहीं होता लेकिन क्या कभी किसी ने एक लेखक के बारे में सोचा है उसकी कल्पना शक्ति के बारे में जो केवल कल्पना से किसी भी किरदार में जान डाल देता है अगर ऐसा नहीं होता तो आज भी उपन्यास प्रेमियों में चंद्रकांता की बात नहीं हो रही होती हां समय बदला है लोग बदले हैं चीज बदल गई है अब शायद कोई उतना कहानी पढ़ना नहीं चाहता लेकिन फिर भी कभी किसी ने यह सोचा है कि हम अपने बच्चों को डॉक्टर इंजीनियर साइंटिस्ट बनाने के बारे में तो सोचते हैं लेकिन क्या कभी कोई एक लेखक को भी उसी सम्मान की दृष्टि से देख पाता है अब यहां लोग कहेंगे हां लेखन का भी सम्मान होता है पुरस्कार मिलते हैं पर क्या
कोई मां-बाप अपने बच्चों से यह कहते होंगे बेटा तुम बड़े होकर लेखक बनना शायद नहीं