उड़ान अभी बाक़ी है, आसमां से कह दो,
हवाओं के रुख़ से कह दो, थोड़ा थम कर बहें।
अभी तो नापी है मुट्ठी भर ज़मीन हमने,
अभी तो पूरा जहान नापना बाक़ी है।
दिए जो राहों के बुझ भी जाएँ अगर,
तो जुगनुओं से रोशनी छीन लेंगे।
ठोकरें लाख आएँ सफ़र में मगर,
हम गिरकर फिर उठना सीख लेंगे।
जो मुक़द्दर में नहीं, वो हम छिन लाएँगे,
जिद्दी हैं इतने कि ज़माने को झुकाएँगे।
आँधियों की क्या औक़ात जो रास्ता रोके हमारा,
हम वो परिंदे हैं जो तूफ़ानों में भी आशियाना बनाएँगे।
- Ritu kumari