ज़िंदगी का असली मज़ा तब आता है,
जब चारों ओर मुश्किलों का घेरा हो… तनाव हो… दर्द हो…
और फिर भी तुम हर मुश्किल को मात देकर सीना तानकर खड़े हो जाओ।
चेहरे पर मुस्कान रखकर कहो—
“हाँ… ये मुश्किल भी टल गई। अब बताओ, अगली कौन-सी है?”
जिस दिन मुश्किलों से घबराना छोड़ दोगे,
उसी दिन ज़िंदगी तुम्हें हराने की कोशिश छोड़ देगी।
याद रखना, अँधेरा चाहे कितना भी गहरा हो,
एक छोटी-सी रोशनी भी उसका रास्ता रोक सकती है।
ठोकरें रास्ता नहीं रोकतीं, वे चलना सिखाती हैं।
और जो आँधियों में भी अपने हौसले को थामे रखता है,
एक दिन वही अपनी कहानी का सबसे खूबसूरत पन्ना लिखता है।
उषा जरवाल ‘एक उन्मुक्त पंछी’