फ़राज़ हमारे तो अपने भी अपने ना हुए।
तुम क्यों गैरों की बात करते हो।।
दोस्ती, दिल्लगी, उम्मीद, भरोसा अब हमें इन अल्फ़ाज़ों
पर ऐतबार नहीं।
हम चल तो पड़े राह पर सबको अपना मान कर।
मगर जाने कौन राह पर काँटे साथ लेके चल रहा था।।
कोई नहीं है हमारा, बस हम ही लोगों का हुआ करते हैं।
ये महफ़िल, ये जश्न में। हमने जाना छोड़ दिया, अब इन महफ़िलों में जाने मन क्यों नहीं लगता।।
लब्ज़ बयान करते हैं सब, मगर किसी को समझ ही नहीं आता।
एक सुबह ये दुनिया मुझे नींद में पाएगी।
कोशिशें बहुत होंगी मुझे जगाने की, मगर कोई मुझे उठा नहीं पाएगा। आएँगे वो सब भी जिन्हें मैं अपना मानता था, आएँगे मगर वो भी कोशिश कर के थक जाएँगे।
कोई रोएगा तो कोई चुप करवाएगा। जाने कौन मेरी माँ को, मेरे बाद कौन संभाल पाएगा।
ये दर्द मैं जीते जी ना सह सकूँ, जाने वो मेरे मरने के बाद कैसे सहेगी।।
ये अजीब दास्तान है दुखों की, दुनिया है यहाँ खुद को खुश रखने से ज्यादा दूसरों को खुश रखना बेहद जरूरी होता है।
हम भी ना जाने किस राह पर चल दिए, उस राह पर मेरा जैसा कोई ना था। हम उस राह पर थे जहाँ से लौटना ना मुमकिन था।
मगर अब उस राह पर काँटे नहीं थे, अब वहाँ पर ज़ख्म देने वाला भी कोई भी था। वहाँ तो बस मेरी यादें थीं, जो मैं अपने साथ ले आया था।।
बेहद खूबसूरत थी वो यादें, माँ के साथ खेलना, माँ को सताना, माँ को हर बात पर याद करना, माँ की गोद में सोना।
ये हसीन यादें मैं अपने साथ ले गया।।
कुछ ऐसी भी यादें थीं, जो बस ख्वाब बन के रह गईं।
अब मैं उनको याद नहीं करता हूँ।।
{मैंने ये जान लिया कि हकीकत से अच्छे ख्वाब होते हैं।
माना हकीकत नहीं होते, मगर खूबसूरत होते हैं।।}
मैं। क्या कुछ ले आया मैं सब से, बस छोड़ के आया तो बस
तक़लीफ़।।
ये हुनरवां देना सब को हुनर की सब अपने आप को और बाकी सब को खुश रख सके।।
अब मेरे जाने का वक्त हो चुका, अब मुझे जाना पड़ेगा।
अब लौटने की कोई गुंजाइश बाकी नहीं रही है।
जो मेरे अपने थे, वो अब किसी और के हो जाएँगे।
जो मेरे हमदर्द थे, वो बस हमदर्द ही रह जाएँगे।
आएँगे शायद मेरे ख्वाब भी, मगर अपने दूसरे ख्वाब के साथ।
जाने दो, अब मेरे जाने का वक्त हो गया है, अब ना मुझ को सताओ।।
आखिरी शेर है कि...
हम मिलेंगे तुमको किसी और जन्म में, शायद इंतज़ार तेरा जाया ना जाए।
ये जो ख़्वाब है मेरा, शायद ये ख्वाब ही रह जाए, इश्क़ में रंज तुम्हे भी मिला होगा, मुझे माफ़ कर देना।
ये दिल्लगी हम दिल से लगा बैठे थे।।
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: कुछ लिखा है की -...
::वो आँखें भी देख ना पाए, जिन्हें ख्वाब था पाने का।
:ख्वाहिश सो गई कब्र में, अब डर नहीं ज़माने का।
:अब निहारता है और कोई तेरी आँखों को, लगता है उसे भी डर नहीं है पछताने का।
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:प्यार एक गुनाह है, सच्चा प्यार मिलना एक श्राप है।
:मिल जाए तो मिल जाए एक बूंद का सहारा, ना मिले तो गुनाहों का समंदर हमारा।
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:क्या वो चाहिए, क्या नहीं, हाँ ना जवाब सवाल है, सवाल जवाब है
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