चेहरा साफ़, मन में दाग,
सामने ताली, पीछे गाली।
मुँह पर आप, पीठ पीछे साँप,
बस यही है आजकल लोगों का रिवाज़।
सामने प्यार की बातें, पीछे जलन का हिसाब,
मतलब निकल जाए तो बदल जाता है जनाब।
चेहरे पर मुस्कान और दिल में हज़ार राज़,
कौन अपना है और कौन नकली—समझना नहीं आसान आज।
इसलिए अब हम भी थोड़ा संभलकर रहते हैं,
हर मीठी बात करने वाले को अपना नहीं कहते हैं।
क्योंकि इस दुनिया में चेहरे नहीं, नीयत पहचाननी पड़ती है,
और हर मुस्कुराते इंसान की कहानी थोड़ी पढ़नी पड़ती है।
बाकी हम तो जैसे हैं वैसे ही हैं, जनाब...
साफ़ दिल वाले हैं, इसलिए शायद आजकल के रिवाज़ों से थोड़े अलग हैं!! 😌🖤