ममत्व
नौ महीने गर्भ में रखा नवजात को,
स्नेह से सँवारा उसके जीवन को।
हर पल उसकी चिंता सताती,
क्षणभर भी उससे दूर न जाती।
कलेजे से सदा लगाए रखती,
ममता की छाँव में उसे रखती।
शुभ मुहूर्त में नवजात का जन्म हुआ,
माँ के हृदय में जैसे चाँद खिला।
रूढ़िवादिता का त्याग किया,
बालिका को उसका अधिकार दिया।
खूब पढ़ाया, खूब दुलार लुटाया,
हर सुख से उसका जीवन सजाया।
माँ की आँखों की वही चाँदनी,
बेटी के जीवन में उजियारा बनी।
माँ का स्नेह अमूल्य धन है,
ममता को मेरा शत-शत नमन है।
माँ केवल जन्म नहीं देती,
वह जीवन को दिशा भी देती है।
बेटी को अधिकार और सम्मान देकर,
उसके सपनों को उड़ान भी देती है।
ममता का यही सच्चा रूप है,
जिसमें प्रेम भी है, अधिकार भी।
माँ के स्नेह की छाँव तले,
बेटी का जीवन बने साकार भी।