Hindi Quote in Poem by Vandna Sharma

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कविता बने पूरक एक दूजे के
कवियत्री डॉ वंदना शर्मा

अपने लिए जीना भी
कितना मुश्किल होता है ना
चार ताने दस निगोहे
पीछा करती दिन भर
क्यों नारी को त्याग की
देवी बना पूजा गया
क्या इंसान बने रहना
काफी नहीं था जीने के लिए
सबके लिए जीते हुए
खुद जीना भूल जाती है नारी
घर तो सबका है, हक जताते सभी
देखभाल की जिम्मेदारी भी तो
बारी-बारी निभाओ सभी
नारी को नारी ही समझो
घर से न बांधो कभी
घर शब्द आराम का सूचक है
वही घर कामकाजी स्त्री के लिए
थकान और जिम्मेदारी है
वही घर गृहिणी के लिए पूरे दिन
की देखभाल लाचारी है
करें अगर सब अपना-अपना काम
बने आत्मनिर्भर, नारी को दे सम्मान
तो बोझ न लगे किसी को गृहस्थी
सबका अपना-अपना हो आसमान
बने पूरक एक-दूजे के
सहयोग से होते सारे काम

डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली

Hindi Poem by Vandna Sharma : 112034219
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