इजाज़त दे,
जब तू मेरे सीने पर सिर रखे
तो मैं अपनी साँसों की गर्माहट
तेरे बालों पर टिका दूँ
तेरे माथे पर जमी
हर छोटी-बड़ी थकान को
धीमे-धीमे,
बेइंतिहा नर्मी से
अपने स्पर्श में समेट लूँ
तेरी पीठ पर रखा मेरा हाथ
तेरी धड़कनों की रफ़्तार पढ़े,
जैसे तू डर-डर कर नहीं,
पूरे यक़ीन से
मेरी बाँहों में सिमट आई हो
हो इजाज़त,
तो मैं इस सिमटने को
तुझमें और गहरा उतरने दूँ ,
बिना कहे,
बिना माँगे,
बस महसूस करने दूं ,
तेरे कंधे और गर्दन के उस मोड़ पर
जहाँ रातें नरम होती हैं,
मुझे अपना सुकून रख लेने दे