कर्म का फल क्या है?
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(१) कर्म के दो ही फल है, (१) कष्ट (२) मज़ा
और इन दो फल के अलग अलग नाम है , कष्ट को हम संघर्ष ,लोभ,लालच,दुख,पीड़ा,भरम कह सकते।
मज़ा को हम आनंद,शांति,संतोष सुकून कह सकते।
अब यह कर्म के फल और समय की गति का सीधा गणित है कि अगर आप को कर्म करते वक्त मज़ा आ रहा है, तो आप के समय की गति तीव्र होगी। अगर कष्ट हो रहा है तो समय आप का धीमा हो जाएगा।
समय की गति यानी घड़ी की गति नहीं, परन्तु आप के भाव की गति।
कभी किसी काम में मजा आया, उसमें खो गए तो १ घंटा भी १ मिनिट जैसा लगता है।
समय की गति,मन के भाव और कर्म के फल का सीधा संबंध है।
अब कोई पूछता है कि मुझे गाली देने में मजा आता है, तो आप गाली दे सकते हो, बाद में गाली सुनने वाला आप के साथ झगड़ा करेगा और आपको कष्ट होगा। जैसे ही कष्ट होगा फल विपरीत हो जाएगा, इसी लिए जिस कर्म से आप को भी मजा आए और दूसरों को भी मजा आए वह कर्म सर्वश्रेष्ठ है और यदि वह अहंकार से मुक्त हो तो कुदरत की तरह सब के लिए लाभदायी है।