🌙 “शायद मैं खुद को ही ढूँढ रही हूँ…”
खुद के अंदर कुछ ढूँढ रही हूँ,
शायद खुद को ही ढूँढ रही हूँ।
एक खाली-सी जगह है दिल में,
जिसे भरने की कोशिश कर रही हूँ।
मिलता है सब कुछ आसपास मेरे,
फिर भी जाने क्या कम-सा लगता है…
शायद कोई चीज़ नहीं खोई मुझसे,
बस मेरा अपना एक हिस्सा
मुझसे कहीं दूर चला गया है। 🥀
“कभी-कभी हमें किसी और की नहीं, बस अपने ही उस हिस्से की तलाश होती है… जो कहीं पीछे छूट गया होता है।” 🌙