🌛 सफ़र और उम्मीद🌜
हर रात का अंत सवेरा है,
माना कि अभी अंधेरा है।
तू राह न छोड़, तू कदम बढ़ा,
मंज़िल ने तुझे पुकारा है।
तू सब्र रख, यह दौर भी ढल जाएगा,
मेहनत का यह सूरज ज़रूर जगमगाएगा।
खामोशी में तेरी जो आग छूपी है,
उसी आग से कल नया सवेरा आएगा।
काँटों से भरी है राह तो क्या,
हर ज़ख्म का हासिल मुक़ाम ही आएगा।
तू बस खुद पर विश्वास बनाए रख,
तेरा कल, तेरे आज से बेहतर मुस्कुराएगा।