मन में बसी अच्छाई और बुराई
बुराइयाँ क्यों हावी हो जाती हैं मन पर,
जबकि अच्छाइयाँ भी तो वहीं रहती हैं?
बुराइयों से बाहर निकलना
इतना मुश्किल क्यों हो जाता है?
क्यों अच्छाइयाँ दब जाती हैं,
क्यों बुराइयाँ मन में घर कर जाती हैं?
न चाहते हुए भी
हम उन्हें अपना लेते हैं।
इंसान समय रहते पहचान नहीं पाता
कि उसके मन में आखिर क्या चल रहा है,
और धीरे-धीरे वही बुराइयाँ
उसकी अच्छाइयों को खोखला करने लगती हैं।
इंसान हमेशा ही अच्छा होता है,
बस कभी-कभी बुराइयाँ
उसकी अच्छाइयों पर हावी हो जाती हैं।
लेकिन जब वह अपने मन को पहचान लेता है,
तो अपनी अच्छाइयों को फिर से जिता लेता है।