❤️ मुझे सिर्फ अपनी ही याद आती है❤️
खुद से ही दूर निकल आया हूँ कितना,
अब तो मुझे सिर्फ अपनी ही याद आती है।
भीड़ की इस दौड़ में, न जाने कहाँ खो गया हूँ,
दूसरों को सुनते-सुनते, खुद से बेगाना हो गया हूँ।
आईने में जो चेहरा दिखता है अक्सर,
पूछता है मुझसे— 'कहाँ गया वो पुराना हमसफ़र?'
बचपन की वो हँसी, वो मासूम-सी बातें,
बिना फिक्र के सोई हुई वो सुकून भरी रातें।
सब छूट गया पीछे, ज़िम्मेदारियों के शहर में,
ढूँढता हूँ खुद को हर बीते हुए पहर में।
अब तो बस एक ही हसरत दिल में मुस्कुराती है,
जहाँ मैं हुआ करता था कभी...
आज मुझे सिर्फ अपनी ही याद आती है।🔰