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भीगी यादे
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क्यूं बारिश यूं बहकने लगी,
क्यूं हवाएं अब महकने लगीं?
वो भीगी सी यादें दिल में कहीं,
आज फिर से दस्तक देने लगीं।
दिल में बसी जो उसकी तस्वीरें,
आज फिर से मुझे वो घेरने लगीं।
सोचा था इस सावन का लुफ़्त उठाऊँ,
पर ये आँखें फिर उसी को ही ढूँढने लगीं।
ये बूंदें जो छतों से टपकने लगीं,
धड़कनें मेरे सीने में फिर मचलने लगीं।
बिन उसके ये अधूरा है हर नज़ारा,
ये तन्हाइयाँ और भी अब मुझे खलने लगीं।
अब तो इन हवाओं से पूछूँ मैं यही,
वो रूठकर मुझसे कहाँ जा बसी?
इस रिमझिम फुहार के इस शोर में भी,
उसकी खामोशियाँ मुझको सुनाई देने लगीं।
-MASHAALLHA
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