📖 सबकी अपनी एक कहानी है... 📖
सबकी अपनी एक अलग कहानी होती है,
जिसकी कहाँ किसे परवाह या पहचान होती है!
फिर भी 'वो ऐसा है, वो वैसा है' की बातें होती हैं,
कौन जाने हक़ीक़त में कौन कैसा और क्यों होता है?
मदद न कर सको तो कोई बात नहीं साहब,
पर दूसरों की ज़िंदगी में यूँ झाँकना छोड़ दीजिए!
किसी पर उँगली उठाने से पहले ज़रा ठहरकर,
खुद को उसकी जगह रखकर देखना सीख लीजिए।
किनारे बैठकर यूँ बेबुनियाद अंदाज़े न लगाइए,
जिस बात का पता नहीं, उसे गलत तरीके से न बताइए!
हर इंसान की अपनी ज़िंदगी का एक सफ़र होता है,
अपनी कहानी का हीरो या विलेन वो खुद ही होता है।
जैसी दुनिया की नज़र, वैसा ही उसका किरदार बन जाता है,
फिर भी हीरो और विलेन के बीच वो संतुलन बना जाता है!
इसी कश्मकश के सफ़र में और वक़्त के बहाव में,
कभी होंठों पर मुस्कान, तो कभी नमी होती है आँखों में...
ज़िंदगी का सच तो हर किसी के लिए यही है साहब,
दूसरों की ज़िंदगी का 'जज' बनने से बेहतर है,
ज़रा खुद के अंदर झाँककर देखने की ज़रूरत है!
– उमाकांत 'उन्मेष'