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खुद को आजमाने का सफर
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खयाल बहुत अच्छा है खुद को आजमाने का,
चलकर सूरज की तपिश में खुद को तपाने का।
जो छिपी थी अब तक भीतर, उस आग को जगाना है,
हर एक कोने से अब उन सब अंधेरों को हटाना है।
मिले मंजिल चाहे देर से ही, हमें इस सफर में,
इरादा साफ है अब अपनी हर मुश्किल को हराने का।
अब हवाओं के रुख बदल लेने से रुकना नहीं,
इन तूफानों के कहर से डर कर पीछे मुड़ना नहीं,
वो दौर बीत गया जब हमने कदम पीछे हटाए थे,
अब मंजिल मिलने से पहले हमें कहीं ठहरना नहीं।
-MASHAALLHA
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