अंधेरे से उजाले की ओर
चाहे राहों में बिछे हों काँटे हजार,
तुम अपने हौसलों को ज़रा धार दो।
माना कि छाई है धुंध हर तरफ़,
तुम उम्मीदों का एक नया दीप जला दो।
गिरकर उठना ही तो ज़िंदगी का हुनर है,
तूफ़ानों से लड़ना ही तो सही सफ़र है।
न हार मानो तुम कभी इन मुश्किलों से,
तुम्हारी मेहनत ही तुम्हारी असली ज़फ़र है।
जो बीत गया, उसे भूलकर आगे बढ़ो,
अपनी कहानियों के तुम नए पन्ने गढ़ो।
चट्टानें भी रास्ता दे देती हैं उस इंसान को,
जो आँखों में सपने लेकर ज़िद पर अड़ो।
सूरज भी ढलता है रोज़ एक नई सुबह के लिए,
अंधेरा टिकता नहीं कभी रोशनी के लिए।
तुम उठो, बढ़ो और अपनी मंज़िल को पाओ,
यह आसमाँ बना ही है सिर्फ़ तुम्हारी उड़ान के लिए!
- Shubhra Dubey