*"सावन में"*
हो रही बरसात सुबह से सावन में
आ गई हरियाली तीज सावन में
रच गई मेहंदी, किया सोलह श्रृंगार
सज गई महफिलें सखियों की सावन में
हरी-हरी चूड़ियां बज रही कलाईयां
पायल भी मचाने लगी शोर सावन में
झूम झूम के काले काले बदरा आए
गाए पपीहा कोयल संग शोर मचाए
भीग गई गौरी की चुनरिया सावन में
पानी की बूंदे पत्तों पे आ ऐसी ठहरी
मोतियों की कोई झड़ी लगाए सावन में
पड़ गए झूले अमिया की डाल पे
सखियां पेंग बढ़ाए, गाए गीत सावन में
सज रही कांवर सज रही झांकी
महादेव भ्रमण को आए सावन में
गरम-गरम पकौड़ी संग चाय बनाए
मम्मी पापा बच्चे सब खाए सावन में
छम छम करता आया सावन, सबको बुलाए
छोड़ो काम सखी आओ थोड़ा गुनगुनाए
कुछ सुने, कुछ सुनाए सावन में
कोई गाए गीत मिलन के
विरह का सावन भी कहीं सताए
बारिश की बूंदें जब तन को छू जाए
याद किसी की बहुत सताए सावन में
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डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली