*भोले सा तू, गौरा सी मैं*
तेरी साँस से मेरी साँस पूरी होती है
दीये बिना लौ अधूरी, नदी बिना धारा अधूरी
तेरे नाम के बिना मेरी हर प्रार्थना अधूरी
तुम चंदन, मैं बेलपत्र
तुम घंटी की आवाज़, मैं मंदिर की देहलीज़
तुम सूरज, मैं उसकी पहली किरण
भोले सा तू, गौरा सी मैं
अलग अलग रहने से भी...
जब तुम साथ हो,
तभी मैं पूरी होती हूँ
— _सृष्टि तिवारी शान