*बदल रही है दुनिया*
बदल रही है दुनिया, हम देख रहे हैं
रिश्तों की खूबियाँ गिनाए जा रहे हैं
सिक्कों से रिश्ते तोले जा रहे हैं
बदल रही है दुनिया, हम देख रहे हैं...।
छल-कपट बढ़ रही आग की तरह
अपनों में भी अपने नहीं दिख रहे दूर-दूर तक
रिश्तों में सिर्फ हाँ की कीमत रह गई है
बदल रही है दुनिया, हम देख रहे हैं...।
छल-कपट उसूल बन गया है
हृदय में कपट भर, इंसान महान बन गया
इंसानों में अब इंसानियत नहीं—इंसान मुखौटा बन गया
बदल रही है दुनिया, हम देख रहे हैं...।
इंसानों की सूरत में भी सुंदरता का मुखौटा लगा लिए
इंसानों के सूरत नज़र नहीं आते हैं
बदल रही है दुनिया, हम देख रहे हैं...।
गुब्बारे में हवा भर, दूध में ज़हर मिला बाज़ार में बेचे जा रहे हैं
पूछो तो सिर्फ कीमत गिनाए जा रहे हैं
बदल रही है दुनिया, हम देख रहे हैं...।
मदिरा के प्रसार में बड़े-बड़े पोस्टर लटकाए जा रहे
टीवी के विज्ञापन में फायदा गिनाए जा रहे हैं
संघ के माध्यम से नशा-मुक्ति आंदोलन चलाए जा रहे
हम देख रहे—दुनिया बदल रही है...।
प्रश्न को दबाए जा रहे हैं
तथ्य को मिथ्या बताए जा रहे हैं
बदल रही है दुनिया, हम देख रहे हैं...।
*एस.टी.डी. मौर्य,*✍️ कटनी (मध्य प्रदेश)