शीर्षक- प्रेम की रंगत*
हम लिखें कहानी प्रेम की, तुम प्रेम बन जाना...।
मैं बनूँ दीप तो तुम मेरी परछाई बन, जीवन भर साथ चलना...।
मैं बनूँ कभी उलझन तो बेहिचक प्रश्न करना...।
उलझन से प्रश्न का प्रेम-करुण महक कम न करना...।
फूलों सा मुकुट तुम्हारा, पायल की खनक तुम्हारी...।
बागों के आँगन में पायल की खनक तुम्हारी...।
फूलों की पंखुड़ी की तरह जुल्फ़ें तुम्हारी...।फूलों सी मुस्कान सदा रहती है तुम्हारी...।
नयन की रंगत, नयन की प्रेम नज़र तुम्हारी...।
पियोनी सी कहानी है नयन की तुम्हारी...।
नयन की पलक छाँव की तरह तुम्हारी,
वर्षा की बूँद की तरह है कहानी तुम्हारी...।
तुम मेरे साथ रहना उम्र भर, प्रीत बरसाना,
छाँव बन जाएगी जग में प्रीत हमारी...।
-एसटीडी मौर्य ✍️
7648959825